Wednesday, November 20, 2019

learning from hands of clock

समय  का महत्व हर किसी के जीवन में होता है या अगर यह कहा जाये कि समय से ज्यादा मूल्यवान और उपयोगी चीज़ कोई दूसरी नहीं है तो अतिश्योक्ति  न होगी। खैर छोड़िये  बात करते हैं ऐसी वस्तु की जो हमें इसी समय का बोध  कराती है। वो वस्तु है -'घड़ी'।
घड़ी  की सुईओं को अगर हम ध्यान से देखे तो सबसे पहले हम पाएंगे की तीनों सूईं एक निश्चित गति से चलती हैं ,जैसे सेकेंड  वाली सूईं सबसे तेज़ ,घंटे वाली सूईं सबसे धीरे  और मिनट वाली सूईं मध्यम(न तेज न धीरे ) गति से चलती है।और पल पल बदलती इन सुईओं की स्थिति ही हमे समय का बोध कराती  रहती  है। परन्तु एक दुसरे नज़रिये से  अगर इन सुईओं की चाल को देखा जाये और जीवन के कर्तवयों  से जोड़ दिया जाये तो कैसा समीकरण होगा वही प्रस्तुत करने जा रहा हूँ। 

सेकंड वाली सूईं -यह सूईं सदा चलायमान  रहती है ,पल पल अपनी  स्थिति बदलती है। तो  यह हमे सीख देती कि जीवन में हमेशा गतिशील रहना चाहिए ।मुश्किल दिनों में न ज्यादा निराश हों और अच्छे दिनों में अतिउत्साहित न  हों। हमेशा जीवन की गति एकरूप रखें। जीवन से बिना कोई शिकायत के हर चुनौती को पार करके अपना जीवन खुश होकर संतुष्टता के साथ जियें और आगे बढ़ते  रहने का जज्बा कायम रखें । 

मिनट वाली सूईं- यह सूईं न  तो ज्यादा तेज न ज्यादा धीरे चलती है। इसका प्रतीकात्मक रूप है- 'विवेक'।
बहुत सोच समझकर कुशलता के साथ कुछ कार्य करना इसी को विवेक कहते हैं। इस सुईं को देखकर भी ऐसा ही लगता है मानो बहुत सोच विचार करके आगे बढ़ रही है। यह न तो सेकंड वाली सूईं को देखकर बहुत तेज होती है न घंटे वाली सूईं को देखकर बहुत धीरे। हमे भी अपनी समझ और विवेक के साथ एक उपयुक्त पथ चुनना चाहिए और जीवन में आगे बढ़ना चाहिए । 

घंटे वाली सूईं -यह सूईं सबसे धीरे चलती है। यह सूईं हमें धैर्यता का सन्देश देती है। इसके बगल से हर समय तेजी से सेकंड वाली सूईं गुजरती रहती है पर यह अपनी धैर्यता का परिचय देते हुए आराम से आगे बढ़ती है। 
हमे भी जीवन में धैर्यता लानी है यदि कोई हमसे आगे निकलता है तो निराश न हो धैर्य बनाये  रखे और विश्वास रखे  कि  हमे भी कभी न कभी मंजिल जरूर मिलेगी।